Monday, September 3, 2007

मी न केलेली कवीता १

मंजिले भी उसकी थी
रास्ता भी उसका था
एक मैं अकेला था
काफीला भी उसका था
साथ साथ चलने की सोच भी उसकी थी
फीर रास्ता बदलने का फैसला भी उसका था
आज क्यों अकेला हूँ , दिल सवाल कर्ता है
लोग तो उसके थे
क्या खुदा भी उसका था ?


संग्रह - सूरज चतर

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