Sunday, July 19, 2020

शराबी

सुबहशाम ऊठ कर तु 
घुॅंट लगाये बार बार
जेब मे ना हो पैसा 
तो तु ले आता उधार, 
ना तेरी अमिरी फिर भी 
दोस्त मिलते चार चार
पैसे ना हो तेरे पास
तुझको लेके जाते बार
क्या करता तु गर तेरी
जेब मे होते दस हजार
हजारों की पिके तुने
बेचा अपना घरबार

भाई से झगडे, रिलेशन्स बिगडे
कब तु सुलझायेगा
रोज की रोटी, शादी को बेटी
कौन तुझे दिलायेगा
बच्चों की पढाई, बेटी की सगाई, 
ईसकी कब तु सोचेगा
माॅं कि बिमारी, बाप की दवाॅंई
वो कहाॅं से लायेगा
ईसिलाये कहता हूॅं 
बंद कर अब ये नादाॅंनी, 
सबकी परेशानी तुने 
ये कभीभी ना जानी
मत भूल तेरी अच्छाई
दुनिया तेरी दिवानी
हुनर तेरा खो ना जाये
जो अबतक है कहानी

रोज रोज पिके तेरा 
यहाॅं वहाॅं गिर जाना
गाडी चलाके मासुमों की
जान से भी खेलना
बंद कर अब ये अत्याचार 
करना तु रोजाना
बटोरनेदे दुनिया को
खुशियों का खजाना
किसने कहा तुझको
पीना है एक बिमारी
तेरी वजह से लगती
सबसे बडी लाचारी
ईस तरहा पी के तुने 
सबकी ईज्जत क्यों ऊछाली
जो भी पी ता सबको लगे 
वो साला है व्यभिचारी 

थोडीसी पी के शांत रहता, 
योदों की बाहों में बहता
प्यासे को पाणी मिल जाता
खुशियों से सारा जग पी ता
ईज्जत से जो पिता 
तो साले तेरा क्या जाता

👉 Datta Chattar

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